सुमति भारव्दाज

16-05-21

संपूर्ण आहार है "केला"

Banana
September 10, 2020
केला हमारे देश का प्राचीनतम फल है। संस्कृत भाषा के अनेक ग्रंथों में केले का उल्लेख मिलता है। जिसमें उसे दोषरहित फल बता कर देवताओं का प्रिय फल बताया गया है। फल के साथ-साथ इसके संपूर्ण वृक्ष को भी देववृक्ष मानकर पूजा जाता है। केले के बड़े-बड़े हरे पत्तों पर भोजन परोसने की प्राचीनतम परम्परा वर्तमान में भी इसलिए लोकप्रिय है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि केले के पत्ते पर भोजन परोसने से या उसमें भोजन लपेटकर रखने से उसमें कोई विकार उत्पन्न नहीं होता। यानि जिस फल के वृक्ष को ही उसके अद्भुत गुणों के चलते देवतुल्य मान्यता मिली हो तो उसके फल के गुणों का भला क्या बखान किया जा सकता है..?? स्वाद में अत्यंत मीठा, खाने में मुलायम तथा पचाने में आसान केला गुणों में इतना अद्भुत है कि वह अपने आप में ही एक संपूर्ण आहार माना जाता है। भोजन के आभाव में केले के दो फल खा लेने भर से ही उदर पूर्ति हो जाती है। इसीलिए व्रतधारी पूरा दिन केवल केले खा कर भी क्षुधा शान्त रखने का सार्म्थय रखते हैं तो गरीब के लिए भी केले खा कर पेट भरना उसकी आर्थिक सार्म्थय शीलता के बाहर नहीं होता। चार से छः महीने के छोटे बच्चों को भी दूध के बाद सबसे पहले केले का स्वाद इसलिए चखाया जाता है क्योंकि चबाने से लेकर पेट भरने व पचाने तक यह फल हर तरीके से छोटे बच्चों के लिए स्वादिष्ट व गुणकारी है। इसके अलावा बड़े बुर्जुगों, खिलाड़ियों, पहलवानों व आजकल के जिम प्रेमियों के लिए भी केला रोजाना किसी न किसी रूप में अपने भोजन में शामिल करना अनिवार्य हो गया है क्योंकि केला सस्ता व आसानी से उपलब्ध होने वाला फल ही नहीं है, अपितु ऊर्जा व पोषण से भी भरपूर है। इसी वजह से इसे आयुर्वेद व चिकित्सा शास्त्र में भी सर्वश्रेष्ठ फल माना गया है। केले में फाइबर की मात्रा भरपूर होने के साथ विटामिन-बी6, विटामिन-सी, और ए के अलावा, मैंगनिज़, पोटैशियम, प्रोटीन और वसा की मात्रा भी भरपूर पाई जाती है। केवल पका हुआ केला ही नहीं अपितु कच्चा केला भी इन सभी पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। मगर दोनों तरह के केलों में केवल स्वाद को लेकर ही नहीं अपितु कुछ पौष्टिक गुणों को लेकर भी मूलतः अंतर अवश्य होता है। कच्चे और पके केले में अंतर दोनों ही तरह के केलों में पौष्टिक तत्व भरपूर व बराबर मात्रा में पाए जाते है मगर कच्चे केले में पके केले की अपेक्षा स्टार्च की मात्रा 40 प्रतिशत अधिक होती है। खासकर रेज़िसटेंट स्टार्च कि वजह से इसका ग्लाईसेमिक इडेंक्स बहुत कम होता है जिसकी वजह से कच्चा केला डाइबीटिज़ के रोगी आसानी से केवल खा ही नहीं सकते बल्कि वह टाइप-2 डाइबीटिज़ के रोगियों के लिए काफी लाभकारी भी है। जबकि पके हुए केले में ग्लाईसेमिक इडेंक्स अधिक होने के कारण यह डाइबीटिज़ के रोगियों को खाने के लिए मना किया जाता है। कच्चे केले में पोषक तत्व खासकर कैल्शियम को पचाने की क्षमता अधिक होती है मगर ऐंटिऑक्सीडेंट गुण पके केले की अपेक्षा कम पाए जाते हैं क्योंकि यह गुण केले में पकने के साथ रेज़िसटेंट स्टार्च के बदलने से बढ़ते हैं। स्वास्थ के लिए केले के लाभकारी गुण 1. एक मध्यम आकार के पके हुए केले में 300 से 400 मि.ग्रा. तक पोटाशियम कि मात्रा पाई जाती है। जो प्रतिदिन की 10 प्रतिशत की पोटाशियम की आवश्यकता को पूरा करता है। पोटाशियम हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है तो केले में कम सोडियम की मात्रा पाए जाने की वजह से यह उच्च रक्तचाप को भी नियंत्रित रखने में मदद करता है। 2. एक केला शरीर की प्रतिदिन की मैगनिज़ की आवश्यकता लगभग 12 से 15 प्रतिशत तक पूरी करता है जिससे न केवल त्वचा को बनाने के लिए कोलॉजन बनाने में मदद मिलती है बल्कि त्वचा की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृध्दि होती है। 3. केले में विटामिन- बी6 की मात्रा भरपूर होती है। जिससे शरीर की 25प्रतिशत की प्रतिदिन की आवश्यकता एक केला खाने से पूरी की जा सकती है। विटामिन-बी6 से मांसपेशियां तो मजबूत होती ही हैं रेड बल्ड सेल की मात्रा भी बढ़ती है। इससे गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे शीशु के विकास में भी सहायता मिलती है। 4. पके केले में विटामिन-सी होता है तो कच्चे केले में विटामिन-सी के साथ विटामिन-ए की मात्रा भी पाई जाती है जो प्रतिदिन की 12 से 15 प्रतिशत की आवश्यकता पूरी करने में सक्षम है। विटामिन-सी से पाचन तंत्र में सुधार होने के साथ रोग प्रतिरोधक शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होने के साथ आयरन जैसे पोषक तत्व को भी पचाने में मदद मिलती है। विटामिन-ए से आंखों की रोशनी बढ़ने के साथ आंखों के रोग दूर करने में भी मदद मिलती है। 5. केले में फाइबर की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। फाइबर की प्रतिदिन की लगभग आधी आवश्यकता केवल एक केला खाने से ही पूरी हो जाती है। इसलिए बच्चे और बूढ़ों को जिन्हें अपच या कब्ज़ की शिकायत हो तो एक केला खाने की सलाह दी जाती है। मगर एक या दो से अधिक केला खाना नुकसान दायक भी हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यदि दो से अधिक केले खा कर उपर से एक इलायची का सेवन कर लिया जाए तो वह शीघ्र पचता ही नहीं है बल्कि नुक्सान से भी बचाता है। केले में फाइबर की मात्रा अधिक होने की वजह से ही लंबे समय तक पेट भरे रहने का एहसास रहता है व भूख नहीं लगती। 6. केलों में तीन तरह की शुगर 1.सक्रोज़,2. फ्रुक्टोज़, 3. ग्लूकोज़ पाई जाती है। जिससे शरीर को वसा व कॉलेस्ट्रॉल मुक्त ऊर्जा मिलती है। कॉलेस्ट्रॉल व वसा मुक्त होने की वजह से यह फल हृदय व उच्च रक्तचाप रोगियों के लिए काफी लाभदायक है। केले का उपयोग कब व कैसे? केले का उपयोग लोग आमतौर पर सुबह नाश्ते में या दोपहर खाने के बाद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार केला सुबह खाली पेट या दोपहर को भोजन के बाद या भोजन से पहले बिल्कुल भी लाभकारी नहीं होता बल्कि, इसका सबसे अधिक लाभ शाम को सूर्यास्त के समय खाने से मिलता है। क्योंकि सुबह खाली पेट केला खाने से यह पेट में अपच व गैस की परेशानी कर सकता है। खाने के बाद खाने से भी पेट में अफारा या अपच की वजह से गैस व डकारों की समस्या हो सकती है। शाम के समय पेट चूंकि न पूरी तरह भरा होता है व ना ही खाली होता है इसलिए ऐसे में केला पचाने में आसानी रहती है जिससे शरीर को इसके पूरे गुणों का लाभ मिलता है। इसलिए यदि आपको सुबह नाश्ते में केला खाना भी हो तो खाली पेट बिल्कुल न खाएं अपितु हल्के नाश्ते जैसे दलिया, ब्रैड व ओट्स जैसे हल्के भोज्य पदार्थों के साथ मिलाकर इसे ले सकते हैं। बनाना शेक, बनाएं तो एक केले में एक कप दूध व एक कप पानी मिलाकर बनाएं व खाली पेट न पिएं व हो सके तो चीनी न मिलाएं या चीनी की जगह एक चम्मच शहद या दो बिना गुठली के खजूरों का उपयोग करें। केले को आम, सेब, आडू व स्ट्रॉबेरी आदि जैसे फलों के साथ मिलाकर भी खाया जा सकता है व स्मूदी आदि भी बनाई जा सकती है। डायबीटिज़ के रोगी पके केले की जगह कच्चे केले से विभिन्न रेसैपियां बनाकर इसके गुणों का लाभ ले सकते हैं। कच्चे केले की सब्जी व कोफ्ते बनाने के अलावा कच्चे केले से चिप्स भी बनाए जा सकते हैं। यहां हम आपको कच्चे केले से सब्जी बनाने की आसान विधि बता रहें है। कच्चे केले से सब्जी कैसे बनाएं!! 4 से 5 कच्चे केलों को कुकर में पानी डालकर एक सीटी आने तक उबालें उसके बाद केलों का छिलका उतार कर उन्हें गोल छोटे टुकड़ों में काट लें। कढ़ाही में तेल डालकर केले के टुकड़ों को हल्का ब्राउन फ्राई करके निकाल लें। अब उसी तेल में जीरा, हींग व कटी प्याज डालकर प्याज को लाल होने तक भूनें। सौंफ पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी, मिर्च, नमक, कसूरी मैथी व गर्म मसाला डालकर एक कप दही डालें व मसालों को दही के साथ तेल उपर आने तक अच्छी तरह भून कर टमाटर डालकर गलने तक दुबारा भूनें। मसाला भुन कर अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए तो फ्राई किये हुए केले के टुकड़े डालकर मसालें में अच्छी तरह 1-2 मिनट तक मिक्स करें और हरा धनिया डालकर आंच बंद कर दें।
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