सुमति भारव्दाज

21-01-21

आरोग्य का खजाना- सौंफ, अजवाईन, मेथी दाना!!

Fennel, Fenugreek, carrom seeds
September 12, 2020
सौंफ, मेथी और अजवाइन ऐसे मसाले हैं जो हर भारतीय रसोई में प्रतिदिन किसी न किसी रूप में अवश्य इस्तेमाल में लाए जाते है। स्वाद और सुगंध से भरपूर इन मसालों में इतने पोषक और प्राकृतिक औषधिय गुण पाए जाते हैं कि इनका उपयोग लाभकारी होने के साथ स्वस्थवर्धक भी है। खाने में चाहे इन्हें साबुत इस्तेमाल करें या पाउडर रूप में करें इनके गुण भोजन को पौष्टिक बना देते है। इतना ही नहीं सौंफ, मेथी और अजवाइन को पानी में उबालकर पीने से ऐसा गुणकारी पानी बनकर तैयार होता है जो कई शारीरिक समस्याओं व बिमारीयों में सोने में सुहागे की तरह काम करता है। आइए विस्तृत रूप से जानते है सौंफ, मेथी और अजवाइन के लाभकारी गुणों के साथ इनसे गुणकारी पानी बनाकर कैसे प्रयोग में लाएं!! मेथी दाना भारतीय रसोई में मेथी दाने का प्रयोग कई प्रकार से किया जाता है। दाल,सब्जी व कढ़ी आदि को बघारने से लेकर अचार आदि में इसका खूब प्रयोग होता है। स्वाद में थोड़ा कसैलापन होने के बावजूद भी इसके गुणों के कारण इसे पाक कला का ज़रूरी अंग समझा जाता है। मेथी दानों में प्रोटीन, विटामिन और मिनरलस की मात्रा काफी होती है जिससे जोड़ों के दर्द, वायु विकार, कफ, बलगम, पुरानी खांसी, अपचन व मांस पेशियों के खिंचाव आदि की समस्या तो दूर होती ही है सबसे अधिक मधुमेह के रोगियों के लिए इसका सेवन लाभकारी होता है। मेथी दाना रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के साथ पेशाब में भी शर्करा की मात्रा को कम कर देता है। इसके नियमित सेवन से कॉलेस्ट्रॉल व वजन भी नियंत्रित रहता है। इसके लिए एक चम्मच मेथी को एक छोटे कप पानी में रात में भिगोकर सुबह खाली पेट खूब चबा चबाकर खाएं व साथ ही पानी का भी सेवन करें। मेथी को हल्का भूनकर उसका पाउडर बनाकर भी हल्के गुनगुने पानी के साथ ले सकते है या मेथी के दानों को अंकुरित कर अन्य अंकुरित दालों के साथ व सलाद के रूप में भी ले सकते हैं। मेथी दानों से एंटीऑक्सीडेंट व एंटीइन्फलामेट्री लाभ लेने के लिए मेथी को पानी में उबालकर चाय की तरह भी इस्तेमाल कर सकते है। शरीर में ओज, कांति और स्फूर्ति में वृध्दि के साथ लंबी उम्र के लिए जितनी उम्र हो उतने मेथी दाने पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट धीरे-धीरे खूब चबाकर बिना पानी से निगले नियमित खाने चाहिए। भीगे हुए मेथी दानों को बारीक पीस कर बालों में लगाने से गंजापन, बाल झड़ने व असमय सफेद होने वाले बालों की समस्या तो दूर होती ही है रूखे व बेजान बालों की अच्छी कन्डीशनिंग भी होती है। चेहरे पर इस पेस्ट को स्क्रब की तरह लगाकर रगड़ने से त्वचा साफ व मॉश्चराइज़ भी होती है। मेथी का पानी बनाने की विधि दो बड़े चम्मच मेथी दानों को चार ग्लास पानी में डालकर उबालें, पानी जब उबलकर आधा रह जाए व मेथी खूब फूल जाए तो आंच बंद करके पानी ठंड़ा होने पर छान लें. इस पानी का सुबह खाली पेट लगभग एक कप के बराबर सेवन करें इससे डायबीटिज़ से लेकर आर्थराइटिस, कॉलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, वायु विकार, अपच, के साथ मासिक धर्म की समस्याओं व वजन घटाने में मदद मिलती है। सौंफ भारतीय सौंफ का रंग हरा व दाने मोटे व बारीक दो तरह के होते है। स्वाद में सौंफ हल्की मीठी होती है जिसे चबाकर खाने से इसकी सुगंध काफी देर तक मुंह में रहती है इसलिए अधिकतर लोग सौंफ का प्रयोग मुखवास के रूप में करते हैं। सौंफ को चबाकर खाने से पाचक रस निकलता है जिससे अधिक तला - भुना व गरिष्ठ भोजन पचाने में आसानी ही नहीं होती बल्कि गैस, एसीडिटी, तथा खट्टी डकारों की समस्या भी दूर होती है इसलिए इसे भोजन के बाद कच्चा या सादा हल्का भूनकर खूब चबा चबाकर इसका रसास्वादन करते हुए खाने की सलाह दी जाती है। सौंफ में विटामिन-ए और सी के अलावा केल्शियम, सोडियम, फास्फोरस, आयरन और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। पेट की सभी प्रकार कि समस्याओं के लिए तो यह प्रभावी है ही सूखी खांसी को दूर करने के साथ आंखों की रोशनी व याददाशत बढ़ाने के लिए भी यह गुणकारी है। इसके लिए सौंफ को मिश्री के साथ मिलाकर नियमित सेवन करना चाहिए। सौंफ के पाउडर का प्रयोग भारतीय व्यंजनों में खास स्वाद देने व रस को गाढ़ा करने के अलावा मछली के व्यंजनों, अचारों, चटनियों, चिक्कियों, शरबतों व इन्सटेंट मिक्स मसालों में भरपूर किया जाता है। जच्चा का दूध बढ़ाने के लिए भी सौंफ का उपयोग गुणकारी है। सौंफ का पानी बनाने की विधि दो बड़े चम्मच सौंफ के दानों को दो ग्लास पानी में लगभग 15 से 20 मिनट तक उबालें, ठंड़ा होने पर इसे छानकर कांच के बरतन में रखें, आधा कप पानी भोजन से पहले पीने से कब्ज, पेट दर्द, मरोड़, अपच व गैस जैसी पेट की समस्याओं से तुरंत आराम मिलता है। छोटे शीशुओं को केवल एक से दो छोटे चम्मच सौंफ का पानी पिलाने से ही पेट की सभी समस्याएं दूर हो जाती है। सुबह खाली पेट एक ग्लास सौंफ का पानी पीने से शरीर की अनावश्यक चर्बी, आंतरिक सूजन व आंखों के नीचे लटकती थैलियों की समस्या से तो छुटकारा मिलता ही है शरीर में खून की कमी भी पूरी होती है। अजवाईन स्वाद में तीखी, चटपटी और थोड़ी कसैली अजवाईन का प्रयोग भोजन में अनेक प्रकार से किया जाता है। चरकसंहिता के अनुसार अजवाईन की तासीर गरम, वात- पित्-कफ नाशक व क्षुधावर्धक होती है। केल्शियम और आयरन से भरपूर अजवाईन गैस, अपच, पेट दर्द, हैजे, दांत व कान के दर्द के अलावा पेट के कीड़ों के इलाज में भी गुणकारी है। सिगरेट,तंबाकू, व पान मसाला आदि का नशा छोड़ने के लिए अजवाईन को मुंह में दबाकर धीरे-धीरे उसका रस चूसते हुए चबाकर खाना चाहिए इससे नशे की तलब कम होती है। पेट की समस्याओं के लिए दो चम्मच अजवाईन को दो नींबू के रस, आधा चम्मच काला नमक, व सेंधा नमक के साथ मिलाकर एक कांच की कटोरी में पतले कपड़े से ढ़ककर रख दें, अजवाईन नींबू के रस में फूलकर धीरे-धीरे 5 से 6 दिन में सूखने लगेगी बीच-बीच में इस मिश्रण को हिलाते रहें, जब अजवाईन एक दम सूख जाए तो इसे कांच की बोतल में भर कर रख लें, यह अजवाईन पेट की सभी समस्याओं का रामबाण इलाज तो है ही इसके अलावा खांसी, सर्दी, व कफ की समस्या के लिए भी अचूक है। खाद्य पदार्थों को गलने सड़ने से बचाने के साथ आयुर्वेदिक औषधियों और सुगंघित तेलों के निर्माण में भी अजवाईन का प्रयोग गुणकारी है। अजवाईन का पानी बनाने की विधि अजवाईन का पानी औषधिय गुणों का भंडार है। इसे बनाने के लिए 6 ग्लास पानी में लगभग 3 चम्मच अजवाईन डालकर ढ़क्कन से ढ़क कर उबालें, पानी जब लगभग आधा रह जाए तो उसे बारीक छलनी से छान कर रख लें, इस पानी का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है शरीर का मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है। इस पानी की इन खूबियों की वजह से ही जच्चाओं को लगभग 40 दिन तक सादे पानी की जगह केवल अजवाईन का पानी ही देने की प्राचीनतम परम्परा आज भी कायम है। शरीर में खुजली या अन्य त्वचा व बालों के रोग होने पर अजवाईन मिले पानी से नहाने की आयुर्वेद में सलाह दी जाती है। रोज सुबह खाली पेट एक ग्लास अजवाईन का पानी पीना संपूर्ण शरीर के लिए लाभकारी है।
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