Ajay Jha

16-05-21

कांग्रेस में बुद्धिहीन दल बुद्धिजीवी दल पर हावी

sonia gandhi, manmohan singh, gulam nabi azad
April 22, 2021
आज़ादी के पहले एक ज़माने में कांग्रेस पार्टी में दो गुट होता था जिसे नर्म दल और गर्म दल के नाम से जाना जाता था. गर्म दल के लोग अंग्रेजों के हरेक अत्याचार का मुंहतोड़ जबाब देने में विश्वास रखते थे और नर्म दल सत्याग्रह और शांतिपूर्ण तरीके से आज़ादी चाहते थे. गर्म दल की हमेशा पार्टी में अनदेखी होती थी और गाँधी के नेत्रित्व वाली नर्म दल का पार्टी में दबदबा होता था. अब कांग्रेस पार्टी में नर्म और गर्म दल नहीं है. पर पार्टी में अभी भी तो दो दल हैं – एक तबका जो सही दिशा में सोचता है और सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाता है जिसे बुद्धिजीवी दल कह सकते हैं और दूसरा तबका जो बिना सोचे समझे और बिना तर्क के लगातार सरकार पर आक्रामक रहता है जिसे बुद्धिहीन दल कहा जा सकता है. कहने की कोई ज़रुरत नहीं कि बुद्धिजीवियों वाले दल की अनदेखी होती है और जिनकी बुद्धि पर शक है वह ही पार्टी के अन्दर हावी रहते है. रविवार को कांग्रेस पार्टी के दोनों दलों का प्रदर्शन एक साथ देखने को मिला. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा जिसमे देश कैसे करोना महामारी से प्रभावी तरीके से लडे के बारे में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिसे मानने में मोदी को कोई संकोच नहीं होना चाहिए. दूसरी तरफ राहुल गाँधी के नेतृव वाली बुद्धिहीन दल जिसने सभी दलों को एक ऐसा संदेश दिया कि उसपर सभी को हंसी ही आ सकती है. राहुल गाँधी भी करोना के बढ़ते प्रकोप से परेशान है, पर उनके सुझाव में, जैसा कि अक्सर होता है, तर्क का कोई महत्व नहीं था. राहुल गाँधी का एक बयान आया जिसमे करोना को कैसे नियंत्रित किया जाए के बारे में उनका सुझाव था. राहुल गाँधी ने घोषणा की कि करोना के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर वह पश्चिम बंगाल चुनाव के और कोई रैली नहीं करेंगे. यहाँ तक तो बात समझ में आती है कि क्यों राहुल गाँधी करोना के सहारे पतली गली से निकलने की कोशिश कर रहे हैं, पर इसके आगे उन्होंने दुसरे दलों को उपदेश भी दे दिया कि वह भी पश्चिम बंगाल में कोई और रैली ना करें. पश्चिम बंगाल में अब तक पांच चरणों में 294 में से कुल 180 सीटों के लिए मतदान हो चूका है. बांकी के 113 सीटों पर अगले तीन चरण में 22, 26 और 29 अप्रैल को मतदान होना है. एक सीट जंगीपुर जहाँ सातवें चरण में 26 अप्रैल को मतदान होना था, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्यासी प्रदीप कुमार नंदी के निधन के कारण चुनाव स्थगित हो गया है. चुनाव निमयों के अनुसार किसी मान्यताप्राप्त दल के प्रत्यासी की मृत्यु की अवस्था में चुनाव स्थगित कर नए तारीख की घोषणा की जाती है, ताकि उस दल को किसी और प्रत्यासी को मैदान में उतारने का मौका मिले. राहुल गाँधी का करोना के बहाने चुनाव प्रचार से अलग हो जाना समझी जा सकती है. पश्चिम बंगाल में पहले चार चरणों के मतदान होने तक प्रदेश की जनता की राहुल गाँधी की प्रतीक्षा करते करते आँखे पथरा गयी थी. आख़िरकार 14 अप्रैल को राहुल गाँधी ने पश्चिम बंगाल की जनताना को दर्शन दिया, गोलपोखर और माटीगारा में राहुल गाँधी की रैली हुयी और अब उनकी मालदा और मुर्शिदाबाद में उनकी दो रैली होने वाली थी जहाँ 22 अप्रैल को मतदान होना है. जहाँ असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में राहुल गाँधी लगातार चुनाव प्रचार करते दिखे, पश्चिम बंगाल से रहस्मय तरीके से राहुल गाँधी गायब दिखे. एक कारण था कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी वामदलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है और केरल में लडाई कांग्रेस पार्टी और वामदलों के बीच थी. अब ऐसा संभव तो था नहीं कि पश्चिम बंगाल में वह वामदलों की तारीफ करते और अगले दिन केरल में वह उनकी बुराई. जब तक केरल में चुनाव संपन्न नहीं हो गया राहुल गाँधी पश्चिम बंगाल से दूर ही रहे. 14 अप्रैल को राहुल गाँधी की रैली में बाद ऐसा कुछ नहीं दिखा कि उनके भाषण से कांग्रेस पार्टी या वामदलों वाली गठबंधन के चुनाव हारने की सम्भावना में कोई अंतर पड़ा हो. मालदा और मुर्शिदाबाद कांग्रेस पार्टी का प्रदेश में बचे हुए कुछ ही गढ़ों में से है. और वहां अब राहुल गाँधी के नहीं जाने से चुनाव परिणाम पर कोई अंतर ही नहीं पड़ने वाला है. मालदा से कांग्रेस पार्टी में प्रत्यासी मोहम्मद मोत्ताकिन आलम मौजूदा विधायक हैं. बर्कत दा, यानि ए.बी.ए. घनी खान चौधरी का यह गढ़ रहा था और अभी भी उनके परिवार का ही वहां बोलबाला रहता है. वही मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के अबू हेना लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और उन्हें जीतने या हारने के लिए राहुल गाँधी की ज़रुरत नहीं है. करोना की आड़ में चुनाव प्रचार से दूर जो जाना राहुल गाँधी ने सोचा होगा कि उनका मास्टरस्ट्रोक हो सकता है, जिसके चपेटे में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस आ जायेगी. पर तथ्य यह है कि राहुल गाँधी को पश्चिम बंगाल में क्या होना है इसकी पूरी जानकारी है और वह अपना या अपने परिवार की किरकिरी करने से अब बचना चाहते हैं. पश्चिम बंगाल में चुनाव समाप्त होने में अब मात्र 10 दिनों का समय बचा है. प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह करोना के केसों में बढ़ोतरी हुयी है पर महाराष्ट्र या दिल्ली की तरह अभी वहां की स्थिति बेहतर है. बड़ी बड़ी रैलीयों का होना, वहां मास्क या अन्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होना आम है, पर अभी तक स्थिति बेकाबू नहीं हुयी है. ऐसे में सभाओं को नहीं करने का राहुल गाँधी का निर्णय और अन्य दलों से भी यही करने की सलाह का कोई खास औचित्य नहीं है. रही बात कांग्रेस के अन्दर बुद्धिजीवी और बुद्धिहीन दलों की तो पार्टी के अन्दर मनमोहन सिंह जैसे लोगों की सख्त कमी है. जो थे भी ऊन्हे या तो हासिये पर पंहुचा दिया गया है या फिर उन्हें चुप करा दिया गया है. बस अफ़सोस यही है कि इस कठिन परिस्थितियों में हो रहे चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता का अब मनोरंजन नहीं होगा, क्योकि युवराज को प्रदेश में जो सांकेतिक प्रचार करना था कर चुके और अब वह अपना नाम बदनाम नहीं करना चाहते.
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